डे कॅथलॉन ज्ञान
मैं आझाद था इसिलिये भटक गया
वो गुलाम था इसीलिये अटक गया
शायद इस माऊससे गिरेंगे लाखो पहाड
साइज छोटा मगर ब्रम्हांड लटक गया
मोहब्बत मोह हैं जिदमे जिहाद बनेगी
ये वो अफसाना जो इंसानको गटक गया
मुझे जानता तो इतना बवाल नहीं होता
जाननेकी कोशिश नहीं इसिलीये खटक गया
समाजकी फिक्र नहीं मेरा चरित्र जानता हुं
इसीलीये हर मोडपे इज्जत झटक गया
श्रीधर तिळवे नाईक
(डेकॅथलॉन सिरीजमधील डेकॅथलॉन अनकॅटेगरीकल ज्ञान ह्या काव्यफायलीतून)
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