चॅनेल लव लव्हर अँड टेररिझम
तरसता रहा कहीसेभी बस उनका एक पल दीदार हो जाये
सामने आयी तो डर लगा कही उनसे ना प्यार हो जाये
वो खिंचके चली आयेगी तेरी तरफ तेरी अंधी उम्मीद हैं
ऐसा न हो तू सोचता रहे उसे किसी औरसे प्यार हो जाये
मैं आया हुं तुझे मेरी जिंदगीका हल समझकर
वो इश्क इश्कही क्या जिसमे इंसान बीमार हो जाये
उसके पास न अकाउंटेबीलिटी हैं ना कोई ओथेंटीसीटी
ये वो माहोल हैं श्रीधर जिसमे हर कोई बीमार हो जाये
कान तो हर किसिके पास हैं पहिले तुम मन कमाओ
सुनना सच आसांन नहीं कही सुनके तू ना खूँखार हो जाये
दिलका महल गिर गया बस पत्थर कुछ बचे हैं अंदर
जबतक मर्यादामे हैं ठीक हैं डर हैं न बेशुमार हो जाये
कुछ फोर व्हीलर्स छोड़ी हैं उन्होंने मेरे शहरके अंदर
सफर तो सारे ख़त्म हो गये धमाके ना कारोबार हो जाये
मजहब तो प्रॉस्पर हो रहे हैं अंजामं मगर पता नहीं हैं
थोडेसे बादल बचे हैं अभीभी कही वोभी ना दीवार हो जाये
कुछ दरख्त मर गये आज नुकसान हुआ वो जंगलका हुआ
इंसानका क्या ज़मीं खाली हुई कह रही हैं "नए बाज़ार हो जाये "
सैतान आसमानसे टपकते नहीं इसी जमीनसे ऊँगते हैं
दुआ माँगता हूँ उनकेलिये कही मेरी ज़मीं न बेकरार हो जाये
श्रीधर तिळवे नाईक
(चॅनेल सिरींजमधील चॅनेल लव्ह लव्हर अँड टेररीझम ह्या मालिकेतून )
Comments
Post a Comment