लव लवर अँड टेरर

 मंजिलपे कुछ नही बस शिव है शून्य है 

शरीर तो शक्ती का एक्सपेरिमेंट है 


यहाँ कोई कामयाबी नही चलती 

शुरू से अंत तक सफरही सफर है 


अल्ला तो शिव का बस एक सगुण रूप 

सेकडो पहचानोमेंसे वो एक पहचान है 


आर्टिफिशियल हैं अपने मजहब पे गरूर

इसे अच्छी तरीकेसे समझना इंटेलिजन्स हैं 


एक किताबमें कभी दुनिया समाई होती है क्या?

जो एक किताबमे समाये वो ना अल्ला ना ईश्वर हैं 


तुने परवरदिगार को भी छोटा कर दिया 

और इसके पीछे तेरा छोटा कद है 


तू सोचेगा नही कितना भी मै कहू 

क्यूँ की तेरे सोचपे मजहबका लॉक है


आपने इस बेवकूफीमें एक दिन तू मरेगा जरूर 

मुझे अभी सी दिखती तेरी सडी हुई लाश है 


गम ये नही की तू मरेगा गम ये है की 

तेरे लाशके साथ दिखती मानव संस्कृतीकीभी लाश हैं 


कई बार अंदरके जानवर ने अंदरका इन्सान खतम किया

ये मेरी बदनसीबी है की यही इतिहास हैं 

जिस इतिहास से कोई सिकता नई ऐसा ये इतिहास हैं 

(चॅनेल सिरीज मधील चॅनेल लव , लवर अँड टेरर या काव्यफायलीतून)

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